राजस्थान में खनिज संसाधन
- खनिज सम्पदा की दृष्टि से राजस्थान की गिनती देश के सम्पन्न राज्यों में होती है।
- देश में खनिजों की उपलब्धता व विविधता के मामले में राजस्थान सबसे अधिक समृद्ध राज्यों में से एक है।
- राजस्थान को खनियों का अजायबघर / खनिजों का संग्रहालय’ भी कहा जाता है।
- राजस्थान में 81 प्रकार के खनिज पाये जाते हैं जिनमें से वर्तमान में 58 खनिजों का उत्खनन हो रहा है।
खनिज क्या है – राजस्थान में खनिज संसाधन
- भूमि से खनन करके निकाले गये रासायनिक व भौतिक पदार्थ जो मानव के लिए विभिन्न क्षेत्रों में उपयोगी होते है वे खनिज पदार्थ कहलाते है।
- राजस्थान में खनिज संसाधन – राजस्थान में खनिज संसाधन का विवरण – खनिज का सम्बन्ध चट्टान से होता है, जो मुख्यतः तीन प्रकार की होती है –
- आग्नेय चट्टाने – आग्नेय चट्टानों के अन्तर्गत सोना चाँदी, ताम्बा, जस्ता, सीसा, मैग्नीज, अभ्रक व गंधक खनिज पाये जाते हैं।
- कायान्तरित चट्टाने – कायान्तरित चट्टानों के अन्तर्गत ग्रेफाइट, हीरा, संगमरमर आदि खनिज पाये जाते हैं।
- अवसादी चटाने – अवसादी चट्टानों के अन्तर्गत कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, रॉक फॉस्फेट, पोटाश व नमक आदि खनिज पाये जाते है।
राजस्थान में कितने प्रकार के खनिज है
- खनिजों को तिन भागों में बांटा गया है ।
- धात्विक खनिज – 1. लौह धातु खनिज – लौह अयस्क, मैग्नीज व टंगस्टन 2. अलौह धातु खनिज – तांबा, सीसा, जस्ता, चांदी
- अधात्विक खनिज – 1. उर्वरक खनिज – जिप्सम, रोक फास्फेट 2. बहुमूल्य पत्थर – तामड़ा व पन्ना 3. विद्युत उपयोगी – अभ्रक 4. उष्मारोधी व उच्चताप सहनीय खनिज – एस्बेस्टोज, फेल्सपार, शिलिका सैण्ड, वरमेकुलेट, चीनी मिट्टी व डोलोमाइट आदि। 5. रासायनिक खनिज नमक, ग्रेनाइट, स्लेट आदि
- उर्जा खनिज – 1. ईंधन खनिज – कोयला, पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस 2 अणु शक्ति खनिज – युरेनियम, थौरियम, बेरिलियम
राजस्थान में प्रमुख खनिज
- धात्विक खनिज –
वे खनिज जो धातु से बने हो अथवा जिनका प्रयोग एक से अधिक बार किया जा सकता हो वे धात्विक खनिज कहलाते हैं।- लौह धातु खनिज – वे खनिज जिसमें लोहे के अंश की प्रधानता पायी जाती है। जैसे लौह अयस्क, मैगनीज व टंगस्टन
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लौह अयस्क –
- लौहा एक धात्विक खनिज है। यह प्रकृति में शुद्ध रूप में नहीं पाया जाता है। बल्कि अयस्क / यौगिक के रूप में मिलता है। लौह अयस्क एक आधारभूत खनिज है। लौह अयस्क में लोहे की मात्रा अलग-अलग होती है।
- इसे 4 भागों में बांटा गया है।
1.मैग्नेटाइट अयस्क (70% लोहांश) 2. हेमेटाईट अयस्क (50-60% लोहांश) 3. लिमोनाइट अयस्क ( 30 से 60 प्रतिशत ) लोहांश 4. सिडेराइट अयस्क (10-48 प्रतिशत लोहांश )
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राजस्थान के प्रमुख लोहा उत्पादक क्षेत्र –
क्र.स. | जिला | स्थान |
1. | जयपुर | मोरीजा – बानोल, रासवोला, बागावास |
2. | सीकर | राजपुरा, नानावास, टोडा, चिपलाटा रामपुर ड़ाबला नीमकाथाना |
3. | दौसा | नीमला-राइसेला ,लालसौठ |
4. | भीलवाडा | बिगोद |
5. | झालावाड़ | डग, पादरपाल |
6. | डूंगरपुर | लोहारिया,तलवारा |
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टंगस्टन –
- यह सामरिक दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण खनिज है, यह अत्यधिक भारी, कठोर व उच्च गलनांक वाली धातु है जिसका प्रयोग विद्युत बल्ब, स्टील को कड़ा करने, चीजों को काटने व एक्सरे ट्यूब आदि में प्रयोग किया जाता है।
- टंगस्टन का प्रमुख अयस्क – वोल्फ्रोमाइट
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राजस्थान के प्रमुख टंगस्टन उत्पादक क्षेत्र –
- राज्य में डेगाना – भाकरी (नागौर) क्षेत्र में टंगस्टन के भण्डार है। जो टंगस्टन उत्पादन की सबसे बड़ी खान है ।
क्र.स. | जिला | स्थान |
1. | नागौर | डेगाना |
2. | सिरोही | रेवदर, बाल्दा, आबूरोड |
3. | पाली | नाना कराब |
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मैंगनीज –
- मैंगनीज अवसादी शैलों से प्राप्त होता है, यह राजस्थान में कम मात्रा में पाया जाता है। इनमे धातु का 45 से 62 प्रतिशत होता है।
- मैंगनीज के प्रमुख अयस्क – साइलो मैलीन, ब्रोनाइट, पाइरोलूसाइट आदि।
- मैंगनीज का उपयोग – इस्पात निर्माण, रासायनिक उद्योग, शुष्क शैल, वायुयान बनाने, ऑक्सीजन, क्लोरीन व ब्लीचींग पाउडर बनाने आदि में किया जाता है।
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पाइराइट (झूठा सोना) –
- यह राजस्थान में बहुत कम मात्रा में पाया जाता है। इसका प्रयोग गंधक का तेजाब बनाने व रासायनिक उर्वरक में किया जाता है।
- पाइराइट्स के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र –
सलादीपुरा (सीकर), नया खेडा व कालाबार (पाली)
पाइराइट्स की सलादीपुरा (सीकर) स्थित खान का 2002 से उत्पादन बंद है।
- अलौह धातु खनिज –
- ऐसे खनिजों में लोहे का अंश नहीं पाया जाता है। जैसे सोना, चांदी, तांबा, सीसा, जस्ता आदि
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तांबा –
- तांबे का मानव के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रहा है अलौह धातु में तांबा सबसे महत्वपूर्ण धातु है। लाल भूरे रंग का यह खनिज अत्यधिक लचीला व बिजली का सुचालक होता है। इस खनिज में मात्र 1 से 3%. ही धातु का शुद्ध अंश प्राप्त होता है।
- तांबे का उपयोग – बिजली के तार बनाने, बल्ब मोटर व इंजन के निर्माण, विद्युत् उपकरण बनाने व घड़ियों के निर्माण में किया जाता है।
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राजस्थान के प्रमुख तांबा उत्पादक क्षेत्र –
क्र.स. | जिला | स्थान |
1. | झुंझुनू | खेतड़ी, बरखेरा, बनवास, चिंचोरी, सुरहरी, सतकुई, कोल्हन |
2. | सीकर | बालेश्वर, नीमकाथाना-सिंघाना, मदान कुदान, बबाई |
3. | अलवर | खो दरीबा, थानागाजी,भगोनी, गुढ़ा किशोरीदास, मुण्डियावास |
4. | भीलवाडा | पुर दरीबा, देवपुरा-बनेडा, |
5. | राजसमन्द | भीम रेलमगरा, मजेरा |
6. | अजमेर | हनोतिया, मोहनपुरा-फरकिया |
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सीसा-जस्ता –
- भारत में सीसा जस्ता सान्द्र का उत्पादन केवल राजस्थान में ही होता है। राजस्थान मे सीसा-जस्ता मिश्रित रूप में मिलता है इस मिश्रित रूप को गेलेना भी कहते हैं।
- सीसा लोहे के बाद सबसे अधिक उपयोग में लिया जाने वाला खनिज है। यह विद्युत का कुचालक होता है तथा यह दूसरी धातुओं के साथ आसानी से घुल मिल जाता है।
- सीसा का अयस्क – गेलेना, पाइरोटाइट
- सीसा का उपयोग – बैटरी उद्योग, हवाई जहाज, टाईप राईटर, रंगरोगन आदि में किया जाता है।
- जस्ता – जस्ते का सबसे अधिक उपयोग लोहा व इस्पात उद्योग में किया जाता है।
- जस्ते का अयस्क कैलेमिन, जिंकाइट, बिलेमाइट आदि ।
- जस्ते का उपयोग – मीटर के पुर्जे बनाने में, सैल बनाने में, स्याही, दवाइयां, बैटरियां, लोहे के पॉलिश करने आदि में किया जाता है।
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चांदी –
- राजस्थान में चांदी का उत्पादन सीसा जस्ता के साथ मिश्रित रूप में होता है। चांदी सबसे अधिक विद्युत की सुचालक होती है। यह सफेद व चमकीले रंग की धातु होती है।
- चांदी के अयस्क – अग्रेनटाइट, पाइराजाइराइट, ओस्टाइट, हॉर्न सिल्वर
- चांदी का उपयोग – तार, आभूषण, सिक्के व रासायनिक फोटोग्राफी आदि में किया जाता है।
- राजस्थान में चांदी उत्पादक क्षेत्र – जावर खान – उदयपुर, रामपुर आगुचा – भीलवाड़ा
- अधात्विक खनिज – वे खनिज जो धातु से निर्मित नही होते वे अधात्विक खनिज कहलाते है। सामान्य भाषा में पत्थर व मिट्टी से बने खनिज अधात्विक खनिज कहलाते है।
- उर्वरक खनिज –
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जिप्सम –
- जिप्सम शुष्क अर्द्धशुष्क व उसर मिट्टी में पाया जाने जाने वाला परतदार खनिज है।
- जिप्सम के अन्य नाम – हरसौठ / सेलखड़ी / गोदंती
- जिप्सम का उपयोग प्लास्टर ऑफ पेरिस बनाने, रंग उद्योग, कागज बनाने, चीनी मिट्टी बर्तन बनाने आदि में किया है ।
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रोक फॉस्फेट –
- यह एक उर्वरक खनिज है जो एपेटाइट व फोस्फोराइट आदि के रूप में पाया जाता है।रॉक फॉस्फेट का उपयोग – उर्वरक खाद बनाने व लवणीय भूमि से सम्बंधित समस्या का उपचार करने के लिए किया जाता है।रॉक फॉस्फेट के उत्पादन में राजस्थान प्रथम स्थान पर है।
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चूना पत्थर –
- चूना पत्थर को लाइमस्टोन के नाम से भी जाना जाता है। यह अवसादी चट्टानों से प्राप्त होता है ।
- चूना पत्थर का उपयोग – सीमेंट निर्माण में, इस्पात उद्योग में वे चीनी परिशोधन में किया जाता है।
- राजस्थान में चूना पत्थर की 36 खाने हैं जिनमें 11 खाने चितौडगढ़ में स्थित है ।
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अभ्रक –
- अभ्रक एक अज्वलनशील खनिज है जो विद्युत का कुचलक है। अभ्रक तापरोधक, विद्युत रोधक, ध्वनी रोधक होती है।
- अभ्रक का उपयोग – विद्युत संबंधी उद्योग, सजावटी सामान बनाने, वायुयान व ताप भट्टियों आदि में किया जाता है।
अभ्रक के बचे हुये चूरे से चद्दरें बनाई जाती है। चद्दरें बनाने वाले उद्योग को माईकेनाइट उद्योग भी कहा जाता है। - राजस्थान के प्रमुख अभ्रक उत्पादक क्षेत्र –
भीलवाडा – नात की नेरी, गोरखन, बंजारी, रतनगामा, तुनका, चापरी व घोगास
उदयपुर – चंपागुढ़ा, मावली, धोलामेतरा, गालवा
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पन्ना –
- यह हरे रंग का मखमल के समान एक बहुमूल्य पत्थर है। हरे रंग का होने के कारण इसे हरी अग्नि के नाम से भी जानते हैं।
- पन्ना के अन्य नाम – मरकत, ताक्ष्य, एमरल्ड
- पन्ना उत्पादक क्षेत्र –
- ग्रीन फायर बेल्ट – ब्रिटेन की माइन्स मैनेजमेन्ट लिमिटेड कम्पनी द्वारा बुबानी व मुहामी (अजमेर) से गांव गुढा (राजसमन्द) तक 221 कि.मी. लम्बी फाइनग्रेड पन्ने की खोजी गयी विशाल पट्टी को ‘ग्रीन फ्रायर बेल्ट’ नाम दिया।
- राजस्थान में पन्ना उत्पादक क्षेत्र
राजसमन्द – कांकरोली
अजमेर – गुडास, राजगढ, बुबनी
उदयपुर – काला गुमान, तीखी, देवगढ़
उष्मारोधी व उच्चताप सहनीय खनिज –
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ऐस्बेस्टास –
- यह एक रेशेदार खनिज है जिसमें मैग्नीशियम सिलिका व जल का मिश्रण होता है। इसे ‘मिनरल सिल्क या रॉक वूल भी कहा जाता है।
- ऐस्बेस्टॉस की दो किस्मे होती है – एम्फीबोल व क्राइसोटाइल
- ऐस्बेस्टॉस का उपयोग – रेल के डिब्बों, जहाजों, चादरों, टाइल्स व बॉयलर निर्माण में किया जाता है।
ऐस्बेस्टॉस से बनी चादरें इंजन व बॉयलर को ढकने के काम में आती है ताकि वे जल्दी से ठंडे ना हो सके। - राजस्थान के प्रमुख ऐस्बेस्टॉस उत्पादक क्षेत्र –
राजसमंद – नाथद्वारा, मोखमपुरा, देवगढ़, कुंभलगढ,
डूंगरपुर – पीपरला, देवल, खेमारू, गोकुलपुरा
उदयपुर – ऋषभदेव, खेरवाड़ा, झाडौल
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फैल्सपार –
- यह खनिज स्वतंत्र रूप से नहीं पाया जाता है इसके साथ पोटाश व सोडास्पर पाया जाता है।
यह खनिज अभ्रक की खानों से सह-उत्पाद के रूप में पाया जाता है। - फैल्सपार का उपयोग – चीनी मिट्टी के बर्तन बनाने, मीनाकारी व सिरेमिक उद्योग में किया जाता है।
- राजस्थान के प्रमुख फैल्सपार उत्पादक क्षेत्र –
डूंगरपुर – माण्डों की पाल, , काहिला,
जालौर, सीकर, सिरोही, अजमेर
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चीनी मिट्टी ( केओलिन )-
- यह राजस्थान में पायी जाने वाली मिट्टियों में सबसे महत्वपूर्ण मिट्टी है।
- यह प्राकृतिक अवस्था में पाई जाने वाली सबसे महंगी मिट्टी है।
- चीनी मिट्टी का उपयोग – बर्तन बनाने में, विद्युत प्रतिरोधी उपकरण बनाने में, सिलिकेट उद्योग में व सीमेंट उद्योग व सिरेमिक उद्योग में इसका उपयोग किया जाता है।
- चीनी मिट्टी घुलाई कारखाना – नीम का थाना में किया जा है। व राजस्थान में सर्वाधिक उत्पादन – वायु रायसीना (सवाई माधोपुर)
- राजस्थान के प्रमुख चीनी मिट्टी उत्पादक क्षेत्र –
सीकर – पुरुषोतमपुरा, बुचारा, टारेडा
उदयपुर – खारा, बरियों का गुढ़ा
सवाई माधोपुर – रायसिना, वसुव क्षेत्र
बीकानेर – चांदी, पलाणा, कोटड़ी, मूढ़
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डोलोमाईट –
- यह कैल्शियम व मैगनीशियम का दुहरा कार्बोनेट होता है, जब चूना पत्थर है में 10 प्रतिशत से अधिक मैगनीशियम की मात्रा पायी जाती है तो वह डोलोमाईट के अंतर्गत ही आता है ।
- हाल ही में राजसंमद के मटकेश्वर क्षेत्र में फास्फेट युक्त डोलोमाइट के नवीन भंडार मिले हैं।
- डोलोमाईट का उपयोग – लोहा व इस्पात उद्योग में।
- राजस्थान के प्रमुख डोलोमाइट उत्पादक क्षेत्र –
राजस्थान में सर्वाधिक डालोमाइट उत्पादन क्षेत्र – उदयपुर, राज्यसंमद, अलवर, झुंझुनू, सीकर, भीलवाड़ा व नागौर जिलों में भी सीमित उत्पादन होता है।
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बेंटोनाइट –
- यह शैल ज्वालामुखी राख के अपघटन से निर्मित होता है। यह हल्के पीले या हल्के गुलाबी रंग में पाया जाता है जो पानी में भिगोने पर फूल जाता है।
- बेंटोनाइट का उपयोग – वनस्पति तेलों व खनिज तेलों को साफ करने, तेल कुओं के ड्रिलिंग करने व सौन्दर्य प्रसाधनों के निर्माण में
- राजस्थान के प्रमुख बेन्टोनाइट उत्पादक क्षेत्र –
बाडमेर – हाथी की ढाणी, गिरल, अकाली गाँव, थुम्बली गांव, धूणली. शिव व बिसाला
सवाई माधोपुर – दरगाबन गाँव
बीकानेर
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संगमरमर –
- चुना पत्थर का परिवर्तित कायान्तरित रूप ही संगमरमर है।
- संगमरमर का उपयोग – यह एक इमारती पत्थर है जिसका प्रयोग शिल्पकला निर्माण में किया जाता है।
- राजस्थान के प्रमुख संगमरमर उत्पादक क्षेत्र – राजस्थान में सर्वश्रेष्ठ श्रेणी का संगमरमर मकराना (नागौर) मे है।
सफेद संगमरमर – राजसमंद, मकराना
सफेद व स्लेटी संगमरमर – मोरावाड़ (राजसमन्द)
काला संगमरमर – भैंसलाना (जयपुर)
नीला संगमरमर – देसूरी (पाली)
पीला संगमरमर – जैसलमेर
हरा संगमरमर – ऋषभदेव, गोगुन्दा, रामनगर, नवागांव
पिस्ता मार्बल – आंधी-झिरी बेल्ट (जयपुर)
चोकलेट ब्राउन मार्बल – मांडलदेह (चितौडगढ) - राजसमंद – राजनगर, आंगरिया, आमेट, केलवा, मोरवाड
नागौर – कुमारी, मेनिया की मारवाडी, भुल्ला पहाडी
डीडवाना-कुचामन – डूंगरी, मकराना
बांसवाडा – त्रिपुरा सुंदरी, भीमकुंड, ओडावरसी , कोठरिया।
ग्रेनाईट – आग्नेय चट्टानों में पाया जाने वाला एक कठोर खनिज है। जो अरावली महासमूह की चट्टानों में पाया जाता है।
ग्रेनाईट का उपयोग भवनों के खंभो, होटलों, मंदिरों के निर्माण में किया जाता है।
राजस्थान के प्रमुख ग्रेनाईट उत्पादक क्षेत्र – जालौर – नून, कालकाजी, कवला, खम्बी, सफारा
सांचौर – रानीवाड़ा
बालोतरा – मोकलसर, राखी
जोधपुर – सालावास, पीपाड़, चौकड़ी, खेजराला
- उर्जा खनिज –
- ईंधन खनिज – यह खनिज कायांतरित चट्टानों से प्राप्त होता है व इन खनिजों से हमे उर्जा प्राप्त होती है। परन्तु इनका प्रयोग हम दुबारा नहीं कर सकते ।
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कोयला –
- उर्जा के प्रारम्भिक स्रोतों में कोयला भी अपना प्रमुख स्थान रखता है। जिसका उपयोग हम प्राचीन समय से ही करते आ रहे है।
- कार्बन की मात्रा के आधार कोयले को चार किस्मों में बांटा गया है।
- एन्थ्रेसाइट – कार्बन की मात्रा (80 से 90 प्रतिशत) उत्तमश्रेणी का कोयला
- बिटुमिन – कार्बन की मात्रा (75-80%)
- लिग्नाइट – कार्बन की मात्रा (50%)
- पीट – कार्बन की मात्रा 50% से कम
- कोयला के उपयोग – घरों में अंगीठी जलाने, कारखानों में इंधन के रूप में, भट्टों में ईट पकाने में, सीमेन्ट उद्योगों व आयरन एंड स्टील उद्योगों में।
- राजस्थान में कोयला उत्पादक क्षेत्र –
बीकानेर – पलाना क्षेत्र (सर्वश्रेष्ठ किस्म का लिग्नाइट), बरसिंगसर, खारी, चारणान, गडियाला, मंडाल व बादनूं
बाड़मेर – गिरल, भादरेस, खूड़ी, बोथिया, कपूरडी
नागौर – मातासुख, कसनाऊ, इन्दावर, मोकला
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खनिज तेल –
- खनिज तेल अवसादी चट्टानों से प्राप्त होने वाला हाइड्रोकार्बन यौगिक का मिश्रण होते हैं। तथा यह प्राकृतिक गैस के साथ निकलता है।
- राजस्थान के पश्चिमी जिलों (जैसलमेर, बीकानेर गंगानगर, बाडमेर) में अवसादी चट्टानें पायी जाने के कारण खनिज तेल एवं प्राकृतिक गैस भंडार होने का अनुमान लगाया जाता है।
- राजस्थान में कच्चे तेल का सर्वाधिक उत्पादन बाडमेर में होता है।
- देश में खनिज तेल की खपत देश के पेट्रोलियम की कुल खपत का लगभग 16% ही उत्पादन होता है। शेष विदेशों से आयात करना पड़ता है। देश में विश्व का लगभग 5 प्रतिशत कच्चा तेल खपत होता है।
- राजस्थान में खनिज तेल / पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस उत्पादक क्षेत्र –
भारत में कच्चे तेल वर्ष 2020-21 के आंकड़ों के अनुसार 30.49 मिलियन टन प्रतिवर्ष है जिनमें से 5.89 टन प्रतिवर्ष उत्पादन राजस्थान में होता है। - कच्चे तेल के उत्पादन में भारत में प्रथम स्थान बॉम्बे हाई (49.6%) का मोगदान देता है। राजस्थान में मुख्यतः 4 पेट्रोलियम उत्पादक क्षेत्र
- सांचौर बेसिन – बाड़मेर व सांचौर जिला
जैसलमेर बेसिन – जैसलमेर जिला
नागौर बेसिन – बीकानेर, चुरू, हनुमानगढ, गंगानगर नागौर जिले
विंध्यन बेसिन – कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड, जिले व भीलवाडा व चितौडगढ का कुछ हिस्सा
राजस्थान में खनिज तेल उत्पादक क्षेत्र –
जैसलमेर – सादेवाला, तनोट, बाघेवाला से टावरी वाला चिन्नेवाला टिब्बा
बालोतरा – नागाणा, कोसलू, बायतु
बाडमेर – सादाझुण्ड, कवास, गुढामालानी अनुपगढ – रावला मंडी, नानूवाला
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प्राकृतिक गैस –
- प्राकृतिक गैस के सबसे अधिक भंडार देश के पूर्वी अपतटीय क्षेत्रों में हैं।
- प्रकृतिक गैस उत्पादन की दृष्टि को राजस्थान का तीसरा स्थान है ।
- राजस्थान के प्रमुख प्राकृतिक गैस उत्पादक क्षेत्र –
- जैसलमेर – शाहगढ, लंगतला, तनोट, दान्देवाला, सादेवाला, घोटारु, मनिहारी टिब्बा
- बीकानेर – बाघेवाला
- बाड़मेर- रागेश्वरी
- अणु शक्ति खनिज – वे खनिज जिनसे आणविक उर्जा प्राप्त की जाती है उन्हे अणु शक्ति खनिज कहते है। जैसे-यूरेनियम, थोरियम व बेरिलियम
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यूरेनियम –
- यह गहरे काले रंग का रेडियो एक्टिव पदार्थ है इसका उपयोग परमाणु बिजली घरों में किया जाता है। क्योकि इसमें बहुत उर्जा होती है।
- विश्व में सबसे अधिक यूरेनियम के भंडार आस्ट्रेलिया में व सबसे अधिक उत्पादन कजाकिस्तान में होता है।
- यूरेनियम के अयस्क – पिचब्लैड व सामरस्काइट
- सीकर के खंडेला में रॉयल व सुहागपुरा में यूरेनियम के 10 हजार टन के भंडार मिले है। यूरेनियम कॉपोरेशन ऑफ इंडिया ने यूरेनियम उत्खनन के लिए सुरंग निर्माण प्रारंभ कर दी जो राजस्थान का पहला व देश का तीसरा प्रोजेक्ट है।(अन्य दो झारखंड व तेलंगाना)
- राजस्थान के प्रमुख यूरेनियम उत्पादक क्षेत्र –
भूणास, कुराडिया (शाहपुरा ) किशनगढ (अजमेर) उमरडा (उदयपुर) रामगढ( बारां)
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थोरियम –
- थोरियम भी आणविक खनिज है यह तटीय क्षेत्रों में मोनाजाइट बालू में प्राप्त होता होता है। केरल के समुद्र तटीय रेत में 8-10 प्रतिशत व बिहार के रेत में 10 प्रतिशत तक मोनाजाइट खनिज प्राप्त होता है। जिससे थोरियम की पुष्टि होती है। राजस्थान में इसका नगण्य उत्पादन होता है।
- राजस्थान में प्रमुख प्राप्ति स्थान – बाँसवाड़ा
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बेरिलियम –
- यह एल्युमिनियम से भी हल्का खनिज जो बिरल नामक खनिज से प्राप्त होता है। तथा इसे तोड़ने पर यह पारदर्शी दिखाई देता है।
- राजस्थान में उच्च किस्म का 11 से 14% वाला बेरिलियम खनिज मिलता है। राजस्थान व बिहार इस खनिज का उत्पादन करते है।
- राजस्थान में बेरिलियम उत्पादक क्षेत्र –
उदयपुर – शिकारबाडी, सिलेका, चम्पागुढा
राजसंमद – आमेट
गुजरवाडा(जयपुर), देवदा(भीलवाडा)
बांदरसिंदरी (अजमेर)